विश्व भर की स्वास्थ्य एजन्सियों के फूल रहे है हांथ-पांव
नई दिल्ली - इस वक्त चाइना समेत पूरे विश्व में कोरोना वाइरस की दहशत फैली हुई है. चीन के वुहान शहर में जन्मा यह वाइरस अब सात समुंदरों का सफर कर विभिन्न देशों तक फैल गया है. अब तक इस बीमारी से केवल चाइना में 100 से अधिक मौते हो चुकी है. अब तक इस वाइरस को रोकने के लिए कोई बी वैक्सिन का आविष्कार नहीं हो पाया है. इसी के चलते लोगों में घबराहट बढ़ती जा रही है.
वैसे तो मानव जाति पिछले हजारो वर्षों से महामारियों से अछूती नहीं रही है. बिसवीं शताब्दी के शुरुआत से विचार करें तो विश्व में प्लेग और चेचक जैसी भयंकर बीमारियां फैली थी, जिन्होंने काफी कहर ढाया था. इन बीमारियों से उस समय हजारो लोगों की जिंदगियां लील ली थी. इसके अलावा 21वीं सदी की शुरुआत में एन्थ्रेक्स, सार्स जैसे वाइरसों का कहर भी देखा गया था.
पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की वाइरसों के कहर की खबरें काफी कम आई, लेकिन पिछले कुछ दिनों से कोरोना वाइरस से होने वाली मौतों की खबरें आने लगी. चाइना से शुरू हुए इस वाइरस का कहर देखते ही देखते पूरे विश्व में देखने को मिला. कोरोना वाइरस का प्रयोगशाला में अध्ययन करने के बाद पता चला कि, यह वाइरस सार्स के वाइरस के साथ काफी साधर्म्य रखता है.
वुहान शहर है वाइरस का केंद्र
चाइना का वुहान शहर औद्योगिक दृष्टि से काफी प्रगत शहर है. पिछले कुछ दशकों में यहां पर तेजी से औद्योगिक विकास हुआ, जिससे यहां पर दुनिया भर से लोग आते रहे. कोरोना वाइरस की शुरुआत वुहान के सी फूड़ से हुई, ऐसा बताया जाता है, लेकिन इसे अभी तक पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता. चाइना के वुहान शहर से जिस भी देश के नागरिक गुजरे, उन्हमें कोरोना वाइरस के अंश मिले. अमरीका, कनाडा, थाइलैंड, ताइवान और जापान के जितने भी लोगों को करोना का संक्रमण दिखाई दिया, वे सभी चाइना के वुहान शहर से लौटे थे.
वाइरस से बढ़ती हुई मौतों को देखते हुए विभिन्न देशों की सरकारों समेंत चीन की सरकार भी हरकत में आ गई है. चाइना के स्वास्थ्य विभाग ने बाहर से लोगों के वुहान में आने पर रोक लगा दी है तथा वुहान के लोगों को दूसरी जगहों पर जाने के लिए प्रतिबंध लगा दिया है.
क्या होता है असर?
यह वाइरस काफी तेजी से फैलता है. इस वाइरस से सबसे पहले न्यूमोनिया होता है. न्युमोनिया पर किए जाने वाले आम इलाजों से यह बीमारी ठिक होती ही नहीं. इस बीमारी में सबसे पहले सांस की तकलीफ होती है. साथ ही इससे सीरदर्द, सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश, तेज बुखार, स्वास्थ्य में असहजता महसूस करना, फेफड़ों में सूजन यह लक्षण दिखाई देते है. यह बीमारी इतनी तेजी से बढ़ती है कि, उचित इलाज होने से पहले ही मरीज की जान जा सकती है.
भारत में क्या है हालात?
कोरोना वाइरस को लेकर भारत भी काफी सतर्क है. क्योंकि भारत में भी इससे पीड़ित लोग मिलने की आशंका सता रही है. केरल में इस संदर्भ में एक मामला सामने आया है. इसे देखते हुए देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग सिस्टम लगाई गई है. चूंकि, इस बीमारी का वाइरस संक्रामक है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से जा सकता है इसलिए इसका फैला तेजी होता है. भारत के सैकड़ों की तादाद में विद्यार्थी चाइना में पढ़ाई करते है. इस वाइरस के चलते अगर अगर यह लोग भारत आते है तो इसका खतरा और भी बढ़ सकता है. इसलिए भारत में इसे रोकने के लिए उचित तरीके से तैयारी करना जरुरी है.
क्या है इलाज?
हालांकि, अब तक इस बीमारी के संदर्भ में कोई ठोस वैक्सिन का आविष्कार नहीं हुआ है. इसलिए पारंपरिक तरीके से इसे रोकने का प्रयास किया जा रहा है. इस देखते हुए इस संक्रमण से बचने का प्रयास करना यही इसके संदर्भ में इलाज हो सकता है.
विश्व भर में क्या हो सकता है असर?
चाइना से शुरू हुआ यह संक्रमण देखते ही देखते विश्व के विभिन्न देशों तक पहुंच चुका है. अमरीका से लेकर जापान तक और भारत से लेकर कनाडा तक करोना की उपस्थिति दिख रही है. इसे देखते हुए अब विश्व स्वास्थ्य संगठन के हाथ-पांव फुलने लगे है. इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एडवाइजरी जारी करते हुए कई सारी एहतियात बरतने को कहा है. लेकिन इस वाइरस के संक्रमण के डर से कई देशों के पर्यटन व्यवसाय पर बुरा असर पड़ सकता है. कुछ देशों की अर्थव्यवस्था ही पर्यटन पर निर्भर है. ऐसे में उन देशों की अर्थव्यवस्था संकट में फंस सकती है. साथ ही देशों के दौरान होने वस्तूओं की लेन-देन में भी हो सकता है, जिसके वैश्विक और दूरगामी परिणाम दिख सकते है.
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