सभी को अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही समझते हुए काम करना चाहिए
सेना के प्रमुख जनरल एम. एम नरवने; एमआईटी-एडीटी युनिवर्सिटी की मनीं वर्षगांठ
पुणे : भारतीय संविधान की पवित्रता को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है, जिसे देश के निर्माण के लिए संविधान के निर्माताओं द्वारा तैयार किया गया था. प्रत्येक भारतीय को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को पहचानते हुए निस्वार्थ भाव से काम करना चाहिए. छात्रों को जिज्ञासु मन से विकास का सही मार्ग चुनकर देश को आगे ले जाना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन भारतीय सेना के प्रमुख जनरल एम. एम नरवने ने किया.
एमआईटी आर्ट, डिझाईन एंड टेक्नॉलॉजी युनिवर्सिटी की पांचवीं वर्षगांठ मंगलवार 11 अगस्त 2020 को ऑनलाइन मीडिया के माध्यम मनाई गई. इसमें मुख्य अतिथि के रुप में जनरल नरवणे बोल रहे थे. विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर इस्त्रो के पूर्व निदेशक पद्मश्री डॉ. प्रमोद काले, केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राघवराव केएसएमएस, एमआईटी एडीटी युनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष, डॉ. विश्वनाथ. दा. कराड, एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष एवं प्रभारी कुलपति प्रा. डॉ. मंगेश कराड, प्रा. सुनीता मंगेश कराड तथा कुलसचिव शिवशरण माली उपस्थित थे.
जनरल एम.एम. नरवाने ने कहा कि मूल्य शिक्षा प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालयों में वातावरण बनाया जाना चाहिए. सभी को अपनी जिम्मेदारी को पहचानना चाहिए. छात्रों को पाठ्यक्रम के साथ, अतिरिक्त पठन करने की आदत डालनी चाहिए. यह आपको नए विचार देगा. टीम वर्क अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेंगा. इसलिए टीम वर्क के साथ कार्य करना चाहिए. लक्ष्य और उद्देश्य निर्धारित करके उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करें. अगर आप अपनी गतिविधियों को समय देते हैं, तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी. समय की पाबंदी सफलता की कुंजी है.
पद्मश्री डॉ. प्रमोद काले ने कहा, कला, डिजाइन और प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण संयोजन है. कोरोना महामारी का शिक्षा पर एक बड़ा प्रभाव पड़ा है.
तकनीक के बढ़ते विस्तार के साथ, शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव हो रहे हैं. दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत है. लॉकडाउन के दौरान वायु प्रदूषण में बड़ी घटौती हुई है. महामारी ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है. वर्तमान स्थिति भारतीयों के लिए मेड इन इंडिया के लिए तैयार होने का एक अवसर है.
राघवराव केएसएमएस ने कहा कि वर्तमान में ऑनलाइन शिक्षा की आवश्यकता काफी बढ़ रही है. कोरोना महामारी ने इस समय पूरी मानव जाति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. अभी स्वस्थ और प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले भोजन की आवश्यकता है. खाद्य उद्योग इस जरूरतों को पूरा कर रहा है. खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता है. खाद्य प्रसंस्करण ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करता है. आऊट ऑफ बॉक्स जाकर कुछ सोचना चाहिए, जिससे मानव जाति का विकास कर सके.
डॉ. विश्वनाथ कराड ने कहा, हमें विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी जानते हुए काम करना जारी रखना चाहिए. अनुसंधान, नवाचार और रचनात्मकता को आपकी कार्य शैली में उपयोग लाना चाहिए. न केवल शिक्षा प्रदान करना बल्कि कल के भविष्य को आकार देने वाले युवाओं को सशक्त बनाने के लिए विश्वविद्यालय की कार्य करे. विश्व स्तर के कला शिक्षा प्रणाली के माध्यम से छात्रों को मूल्यवान शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए. विज्ञान के साथ-साथ आध्यात्मिकता सिखाने से सभी समस्याओं का समाधान होगा.
प्रा. डॉ मंगेश कराड ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी संकाय ऑनलाइन शिक्षा के लिए तैयार हैं. विश्वविद्यालय में एक नवाचार संस्कृति का निर्माण किया है. हम नैतिक मूल्यों का संरक्षण करते हुए मूल्य शिक्षा को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं. हमारा लक्ष्य ग्लोबल प्रोफेशन बनाना है. वर्चुअल लैब, क्लाउड लैब, वीडियो लैब, ई-बुक और ऑनलाइन परीक्षा के तरीकों के माध्यम से विश्वविद्यालय शिक्षा प्रदान कर रहा हैं.

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