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China Victory Day Parade | जापान को आँख दिखा रहा चीन! विजय परेड में पुतिन किम के साथ दिखाएंगे 'ताकत', ये 26 विश्व नेता करेंगे शिरकत

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन अगले हफ़्ते बीजिंग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक सैन्य परेड में शामिल होंगे। यह एक ऐतिहासिक यात्रा होगी। यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किम से मिलने की इच्छा जताए जाने के कुछ दिनों बाद हो रही है, जो शायद ही कभी विदेश यात्राएँ करते हैं। इसके अलावा, व्हाइट हाउस यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता कराने की कोशिश कर रहा है। 3 सितंबर को चीन की "विजय दिवस" ​​परेड द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के औपचारिक आत्मसमर्पण और संघर्ष की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ का प्रतीक होगी। 

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चीन इस समारोह को ‘‘द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी आक्रमण के खिलाफ प्रतिरोध की लड़ाई’’ बताता है। इस परेड में विदेशी नेताओं की मौजूदगी को लेकर जापान और चीन के बीच कूटनीतिक तनातनी हो गई है, क्योंकि तोक्यो ने विश्व नेताओं से इस आयोजन में शामिल न होने की अपील की थी। उसका कहना है कि इसमें ‘‘जापान-विरोधी भावनाएं’’ झलकती हैं।

चीन ने जापान के इस अनुरोध पर नाराजगी जताते हुए कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है। चीन के सहायक विदेश मंत्री होंग लेई ने बृहस्पतिवार को यहां घोषणा की कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के आमंत्रण पर 26 विदेशी नेता विजय दिवस समारोह में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इन नेताओं में पुतिन और किम भी शामिल हैं। होंग ने कहा, ‘‘तीन सितंबर को चीन एक भव्य सैन्य परेड का आयोजन करेगा, जो चीनी जनता के जापानी आक्रमण के खिलाफ युद्ध और फासीवादी विरोधी विश्व युद्ध में विजय की 80वीं वर्षगांठ को समर्पित होगा।’’

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यह परेड 31 अगस्त और एक सितंबर को तियानजिन शहर में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद बीजिंग में आयोजित होगी। पिछले हफ्ते, चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने बताया था कि 20 विश्व नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, जिनमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस भी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान की दो दिवसीय यात्रा के बाद तियानजिन में इस सम्मेलन में भाग लेंगे। चीन का प्रयास है कि एससीओ सम्मेलन में आए नेताओं को अपनी परेड में भी शामिल किया जाए। इसी से जापान नाराज है। जापानी समाचार एजेंसी ‘क्योदो’ ने मंगलवार को बताया कि जापान ने अपने विदेशी दूतावासों के माध्यम से अन्य देशों को संदेश दिया है कि चीन का यह आयोजन ‘‘जापान-विरोधी भावनाएं’’ दर्शाता है और नेताओं को भागीदारी पर सावधानी से विचार करना चाहिए।

चीन के विदेश मंत्रालय ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए जापान के समक्ष कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है। उसने कहा कि जापान अगर वास्तव में ऐतिहासिक मुद्दों को पीछे छोड़ना चाहता है, तो उसे अपने आक्रामक अतीत को स्वीकार करना चाहिए, सैन्यवाद से पूरी तरह किनारा करना चाहिए, शांतिपूर्ण विकास के मार्ग पर चलना चाहिए और चीन व अन्य पीड़ित देशों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले अन्य नेताओं में तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह शामिल होंगे। चीन के सहायक विदेश मंत्री लियु बिन ने पहले बताया था कि भारतीय उपमहाद्वीप से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू इस सम्मेलन में भाग लेंगे।



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