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America Iran Attack Plan: हो सकता है किसी भी वक्त हमला! ईरान में अब्राहिम का खौफ

अमेरिका ईरान में तनाव के बीच युद्ध का काउंट डाउन एक बार फिर से स्टार्ट हो गया है। ट्रंप का एक ही मकसद है कि किसी भी कीमत पर खामनेई सरकार का तख्तापलट। अमेरिका का सबसे खतरनाक वॉरशिप अब्राहिम गल्फ की खाड़ी में पहुंच चुका है। जिसके बाद ईरान में हड़कंप मचा हुआ है। अब्राहम लिंकन अमेरिका के सबसे विनाशक एयरक्राफ्ट कैरियर्स में से एक है जो न्यूक्लियर पावर से चलता है। 1 लाख टन से ज्यादा वजनी अब्राहम पर 5000 सैनिक तैयार रहते हैं और 60 से 70 लड़ाकू विमान मौजूद रहते हैं। दुनिया के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट में शामिल अब्राहम के साथ एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप चलता है। जिसमें गाइडेड मिसाइल क्रूजर, विध्वंसक जहाज, पनडुब्बिया और सप्लाई जहाज शामिल रहते हैं। यह सब मिलकर एक विशालकाय समुद्री बीड़ा बनाते हैं। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका एयर विंग है। 

यूएसएस अब्राहम लिंकनः समुद्र में चलता-फिरता हवाई अड्डा

यूएसएस अब्राहम लिंकन अमेरिका का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत है, जो चलता-फिरता हवाई अड्डा माना जाता है। इससे कई तरह के अभियान संभव हैं।
कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा
अरली बर्क श्रेणी के गाइडेड मिसाइल
विध्वंसक साथ तैनात
यूएसएस स्यूअन्स
यूएसएस माइकल मर्फी
यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर
1,092 फीट लंबाई
90 विमान क्षमता
5,680 कुल क्रू
56 किमी प्रति घंटा अधिकतम गति
ऑपरेशन में तैनात हैं...
एफ/ए-18 ई और एफ सुपर हॉर्नेटः लड़ाकू विमान ।
ईए-18जी ग्राउलर : यह विमान इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में सक्षम ।
एफ-35सी लाइटनिंग-2: स्टेल्थ लड़ाकू विमान ।
ई-2डी हॉकआईः हवाई निगरानी और कमान विमान।
पनडुब्बी रोधी हेलीकॉप्टर भी।

इसे भी पढ़ें: अमेरिका ने उतारा जंगी जहाज, क्या डर से ईरान करना चाहता है ट्रंप से डील?

अटकलें लगाई जा रही है कि ट्रंप किसी भी वक्त हमले का आदेश दे सकते हैं। खबर है कि ईरान के सुप्रीमो अयातुल्ला खामनेई  बंकर में छिप गए हैं और कमान उनके बेटे ने संभाल ली है। अमेरिकी सोर्सेस से खबर है कि अब्राहम लिंकन के साथ ही तीन विनाशकारी जंगी जहाज भी डिप्लॉय कर दिए गए हैं। इनके निशाने पर सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि ईरान के वह सीनियर नेता भी हैं। जिन्होंने प्रदर्शन को बेरहमी से कुचलने की कोशिश की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वक्त ईरान अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। 1989 के बाद से पहली बार ईरान की आर्थिक हालत बेहद खराब हो चुकी है। इतना ही नहीं सत्ता पर भी खामिनी की पकड़ कमजोर हो गई है। इसलिए ट्रंप को लगता है कि ये हमले का बिल्कुल सही वक्त है।


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