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Bangladesh में मचा हड़कंप! 17 महीने की खामोशी टूटी, Sheikh Hasina की दहाड़- उखाड़ फेंको यूनुस सरकार!

बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल होने के 17 महीने बाद, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी है। भारत में रह रहीं अवामी लीग की नेता ने एक कड़े संदेश के माध्यम से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर तीखा हमला बोला और बांग्लादेश की जनता से इस शासन को उखाड़ फेंकने की अपील की। हसीना ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि बांग्लादेश को पिछले वर्ष (अगस्त 2024) हुई हिंसक घटनाओं की संयुक्त राष्ट्र (UN) से 'निष्पक्ष जांच' कराने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में देश "चरमपंथी सांप्रदायिक ताकतों और विदेशी अपराधियों के हमले से तबाह" हो रहा है।

शेख हसीना की भारत से पहली हुंकार

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश की जनता से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया और कहा कि अगर यह सत्ता में बनी रहती है तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं होंगे। ढाका से नयी दिल्ली आने के 17 महीने बाद भारत में अपने पहले सार्वजनिक भाषण में, अवामी लीग की नेता ने यह भी कहा कि बांग्लादेश को संयुक्त राष्ट्र से पिछले वर्ष की घटनाओं की ‘‘निष्पक्ष जांच’’ करने का आग्रह करना चाहिए।

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उन्होंने लोगों से संविधान को ‘‘बहाल’’ करने और धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। नयी दिल्ली में एक कार्यक्रम में हसीना का पहले से रिकॉर्ड किया गया ऑडियो क्लिप चलाया गया। यह संदेश बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों के लिए प्रचार शुरू होने के एक दिन बाद आया। अवामी लीग पार्टी को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। अपने संबोधन में हसीना ने यूनुस पर जमकर हमला बोला और उन पर ‘‘अवैध’’ शासन चलाने का आरोप लगाया।

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उन्होंने यह भी कहा कि देश अब ‘‘चरमपंथी सांप्रदायिक ताकतों और विदेशी अपराधियों के भयावह हमले से तबाह’’ है। अगस्त 2024 में सरकार विरोधी व्यापक आंदोलन के कारण 78 वर्षीय हसीना को ढाका छोड़कर भारत आना पड़ा था। तब से वह भारत में रह रही हैं।

पृष्ठभूमि: निर्वासन के 17 महीने

शेख हसीना का यह बयान बांग्लादेश में होने वाले आगामी चुनावों से ठीक पहले आया है, जिससे ढाका में राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है। जहाँ एक ओर यूनुस सरकार देश में सुधारों का दावा कर रही है, वहीं हसीना के इस आह्वान ने चुनावी निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 

78 वर्षीय शेख हसीना का 17 महीनों में उनका पहला औपचारिक और सार्वजनिक संबोधन है, जो पड़ोसी देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। 



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