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पाकिस्तान के पश्तून नेता मंजूर पश्तीन गिरफ्तार

पश्तून लोगों की आवाज दबाने का पंजाबी इस्टैब्लिशमेंट का एक और प्रयास 


इस्लामाबाद: पाकिस्तानी पुलिस ने पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) के नेता, मानव अधिकार कार्यकर्ता मंज़ूर पश्तीन को गिरफ्तार कर लिया है. मंजूर पश्तीन पाकिस्तानी सेना द्वारा किये जाने वाले भीषण अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाते आ रहे हैं. पाकिस्तानी सेना द्वारा पश्तून, बलोच और मोहाजिर लोगों को बिना किसी कारण के गिरफ्तार कर उन्हें गायब किया जाता हैं, या उनकी अवैध रूप से हत्याएं कर दी जाती हैं.

पुलिस अधिकारी नबीबुल खान ने अल जज़ीरा चॅनेल को बताया कि मंजूर पश्तीन को उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर के शाहीन टाउन इलाके से रविवार देर रात गिरफ्तार किया गया. खान ने कहा, "डेरा इस्माइल खान शहर पुलिस स्टेशन से पुलिस को एक मामले में उसकी आवश्यकता थी, इसलिए हमने उसे गिरफ्तार कर लिया."

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, 27 साल के मंजूर पश्तीन अपने हालिया सार्वजनिक भाषणों में पाकिस्तान के खिलाफ अपमानजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करते हैं इसलिए उनपर  राजद्रोह के आरोप रख कर गिरफ्तार किया गया था.

पेशावर की एक अदालत ने बाद में पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए पश्तीन को 14 दिनों के लिए हिरासत में रखने के आर्डर दिए.

एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा इस घटना की निंदा की गयी हैं. एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा किये गए ट्वीट में कहा गया हैं कि, मंज़ूर पश्तीन को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण मानवाधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए मनमाने तरीके से हिरासत में लिया गया हैं. उसे तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाना चाहिए.

अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी पश्तीन की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए ने सोमवार को ट्वीट कर कहा कि वह मंजूर पश्तीन की गिरफ्तारी से परेशान हैं. पीटीएम नेता की रिहाई की मांग को लेकर पड़ोसी देश के अन्य अधिकारी और राजनेता भी गनी का साथ देते दिखाई दे रहे हैं. मगर पाकिस्तान द्वारा गनी के बयान से कड़ी प्रतिक्रिया आयी हैं.

विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया, राष्ट्रपति अशरफ गनी के हालिया ट्वीट गंभीर चिंताजनक बात हैं, जो पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में स्पष्ट हस्तक्षेप है. इस तरह के बयानों से, दोनों देशों के बीच भी तनाव तनाव के माहौल में बढ़ोतरी दिखाई दे रही हैं.

पश्तून पाकिस्तान में दूसरी सबसे बड़ी आबादी हैं. इसके बावजूद भी पाकिस्तान की पंजाबी इस्टैब्लिशमेंट द्वारा पश्तूनों को मूलभूत अधिकार भी दिए नहीं गए एवं उन्हें दहशतगर्दी में इस्तेमाल कर उनकी कुर्बानिया दी गयी. बावजूद इसके उन्हें पाकिस्तान के दुसरे दर्जे के नागरिक समझा जाता रहा.

इन अत्याचारों के खिलाफ देशव्यापी रैलियों के माध्यम से मंजूर पश्तीन आवाज उठाते रहे. इन रैलियों में दिए गए भाषणों की वजह से पुलिस ने केस दर्ज कर पश्तीन और अन्य पीटीएम नेताओं पर देशद्रोह का आरोप लगाया.

हालांकि, यह पहली बार है जब मंजूर पश्तीन को इस तरह के मामले में गिरफ्तार किया गया हैं. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट के एक अन्य नेता और संसद के सदस्य मोहसिन दावर ने भी मंजूर पश्तीन को गिरफ़्तार करने की पुष्टि की हैं. दावर ने सोमवार को एक ट्वीट कर कहा कि, यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से हमारे अधिकारों की मांग के लिए दी गयी सजा है और मंज़ूर की गिरफ्तारी ही हमारे संकल्प को मजबूत करेगी.

कौन हैं मंजूर पश्तीन?

मंजूर पश्तीन और अन्य युवा कार्यकर्ताओं द्वारा पश्तून तहफ़्फ़ुज़ मूवमेंट की स्थापना तब की गयी जब अपने मूल दक्षिण वजीरिस्तान में तालिबान के खिलाफ पाकिस्तानी सेना के युद्ध से उन्हें विस्थापित होना पड़ा. पेशावर से 250 किमी दक्षिण में स्थित डेरा इस्माइल खान में पीटीएम की स्थापना की गयी थी. तालिबान के खिलाफ इस युद्ध में हजारों पश्तून पुरुष, महिलाओं और बच्चों पर पाकिस्तानी सेना द्वारा जुल्म ढाये गए जिनका ना तालिबान से कोई लेना देना था और ना ही दहशतगर्दी से!

मामले ने तूल तब पकड़ा जब नक़ीबुल्ला महसूद नाम के निष्पाप युवक को सिंध प्रान्त में जब किसी भी कारण के बिना पाकिस्तानी पुलिस द्वारा गोली मारकर ह्त्या कर दी गयी थी, जब की उसका दोष इतना ही था की वह पश्तून समुदाय से था.

तब से, मंजूर पश्तीन ने पाकिस्तान में हजारों लोगों की रैलियों का नेतृत्व किया है. इन रैलियों में पाकिस्तानी सेना द्वारा अवैध रूप से लापता किये गए पीड़ित लोगों के लिए न्याय की मांग करते हुए, सुरक्षा बलों की हिरासत में रहते हुए पश्तूनों की गयी हत्याएं और उन्हें दी गयी यातनाओं के खिलाफ आवाज उठाई गयी थी. 
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