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इन्फ्लूएंजा संक्रमित मरिजों की उचित जांच की जाए Do Proper health checkup of influenza infected patients

स्वास्थ्य संचालक डॉ. अर्चना पाटिल के कड़े निर्देश




पुणे - इस समय पूरे विश्व में करोना वाइरस का खतरा काफी बढ़ गया है. इस पृष्ठभूमि पर स्वास्थ्य संचालक डाॅ. अर्चना पाटिल ने राज्य के सरकारी तथा विभिन्न स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के अस्पतालों में आने वाले इन्फ्ल्युएंजा संक्रमित मरिजों की उचित तरीके जांच की जाए, ऐसे कड़े निर्देश दिए है. इलाज में कोताही बरतनेवालों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत भी डाॅ. पाटिल ने इस समय दिए.

डाॅ. पाटिल ने इस संदर्भ में पूरे राज्य के जिला स्वास्थ्य अधिकारियों, सिविल सर्जनों, महानगर पालिकाओं के स्वास्थ्य अधिकारी तथा तथा मेडिकल काॅलेजों के डीन को एक पत्र जारी कर इस संदर्भ में कड़े निर्देश जारी किए है.

उन्होंने कहा कि, इस समय करोना वाइरस का दुनिया भर में फैलाव हो रहा है. इसी के चलते चीन के हबेई प्रांत के वुहान शहर में कई लोग इस गंभीर बीमारी के चपेट में आए है. इस स्थिति से निपटने के लिए तथा देश में इस बीमारी का फैलाव ना हों, इस के लिए देश के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर दूसरे देशों से आने वाले लोगों की कड़ी स्वास्थ्य जांच शुरू कर दी गई है.

विदेश से आने वाले बीमारी के संदिग्ध यात्रियों की जांच-पड़ताल एकीकृत स्वास्थ्य सर्वेक्षण कार्यक्रम के तहत की जाएगी. पुणे स्थित 'राष्ट्रीय विषाणु संस्थान' (एनआईवी) में कोरोना बीमारी  के पड़ताल की अच्छी सुविधा उपलब्ध है.

जिन पेशंट्स को इन्फ्लूएंजा की आशंका एवं सांसों की बीमारी के संक्रमण शिकायत है, उनका  सर्वेक्षण किया जाना जरूरी है. पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों को न्यूमोनिया तथा पांच साल से ज्यादा उम्र वाले जिन पेशेंट्स को अचानक बुखार, खांसी, गला बैठना, सास फूलना तथा सांस लेने में परेशानी ऐसी शिकायतें पाई जाएं, उनका पूरा इलाज किए जाने का आदेश इस पत्र में दिया गया है.

ऐसे पेशेंट्स के लिए जिला अस्पतालों में अलग कक्ष तथा गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए वेंटीलेटर तैयार रखने का आदेश भी दिया गया है.



क्या है 'कोरोना' वाइरस ?

सर्दी-खांसी जैसी साधारण बीमारियों को मर्स या सार्स जैसे गंभीर रोगों तक पहुंचाने वाले एक विशेष तरह के जर्स को 'कोरोना' कहा जाता है. वर्ष 2003 में पाया गया सार्स रोग भी एक प्रकार के 'कोरोना' जर्स की वजह से ही फैला था. फिलहाल चीन में पाया जा रहा वायरस भी 'कोरोना' ही है, मगर उसकी जेनेटिक संरचना पूर्णत: नई है, इसलिए उसे 'नॉवेल कोरोना कीटाणु' नाम दिया गया है.

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