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मलाला युसुफजई का हमलावर आतंकी हुआ फरार, पाकिस्तान का आतंकी चेहरा फिर हुआ उजागर

पाकिस्तानी सुरक्षा एजन्सियों के काम पर सवालिया निशान



नई दिल्ली - दुनिया की सबसे कम उम्र की नोबल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई पर जानलेवा हमला करने वाला आतंकी पुलिस और सुरक्षा एजन्सियों के चंगुल से फरार होने में कामयाब हो गया है. रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो, यह घटना पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजन्सी आईएसआई की तालिबान और आतंकी गुटों के साथ सांठ-गांठ उजागर करती है. इस घटना से फिर एक बार साबित हो रहा है कि, पाकिस्तान का हाथ तालिबान के साथ.

ज्ञात हों कि, पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा को लेकर मलाला युसुफजई स्वात घाटी में काम कर रही थी. लेकिन उन्हें तालिबानी आतंकियों ने ऐसा ना करने की चेतावनी दी थी. लेकिन मलाला ने इस चेतावनी को दरकिनार कर यह काम जारी रखा था. इससे गुस्साए तालिबानी आतंकियों ने वर्ष 2012 में मलाला युसुफजई को सीर में गोली मारी थी. इस हमले में मुख्य आरोपी एहसानुल्लाह था. वह तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान का मुख्य प्रवक्ता के तौर पर काम करता था.

इतना जघन्य हमला होने के बाद पाकिस्तान की पूरी दुनिया में किरकिरी हो रही थी. इसे देखते हुए पाकिस्तान ने मलाला को इलाज के लिए ब्रीटेन भेजा और मलाला पर उच्च कोटी के इलाज किए गए, जिससे वह जिंदा बच गई. इसके बाद उसे नोबेल प्राईज दिया गया था. आज मलाला युसुफजई कनाड़ा की नागरिक है और उसे सभी सरकारी सुविधा हासिल है.

इस हमले का मुख्य आरोपी एहसानुल्लाह एहसान को बाद में गिरफ्तार कर उस पर केस चलाया गया. पिछले कुछ वर्षों से वह पाकिस्तान की जेल में बंद था. हालांकि, पाकिस्तान हमेशा ही अपने आप को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने की बात कहता है,  लेकिन उसका यह ढोंग उजागर हो ही जाता है. गुरुवार को सार्वजनिक हुई एक खबर ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजन्सियां, पुलिस और तालिबान की सांठ-गांठ फिर उजागर हो गई है.

जेल में बंद आतंकी एहसानुल्लाह पुलिस और सुरक्षा एजन्सियों की चंगुल से फरार हो गया है. हालांकि, एहसानुल्लाह के फरार होने की खबर अभी आई है, लेकिन वह 11 जनवरी को ही फरार होने की पुष्टि हो रही है. अपने फरार होने की जानकारी खुद एहसानुल्लाह ने एक ऑडियो क्लिप के माध्यम से दी है. खास बात यह कि, उसने अपनी इस क्लीप में पाकिस्तानी सेना ने अपना वादा निभाया ऐसा बोल रहा है.

इस आॅडियो क्लीप से और एहसानुल्लाह के बयान से यह साबित हो जाता है कि, उसे फरार होने में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने उसकी मदद की होगी. अपनी भविष्य की योजनाएं जल्द ही घोषित की जाएगी, ऐसी जानकारी भी एहसानुल्लाह ने इस क्लीप में दी है.

एहसानुल्लाह के फरार होने के चलते पाकिस्तान के स्वात घाटी में फिर एक बार तालिबानी आतंकियों का उत्पात बढ़ सकता है. पाकिस्तान पिछले 10 वर्षों से वाना-वजिरीस्तान और स्वात घाटी में तालिबानी आतंकियों के खिलाफ जर्बे-अज्ब नाम की मुहिम छेड़ रखी है. इस मुहिम के  लिए पाकिस्तान अमेरीका और उसके पश्चिमी दोस्तों से अब तक अरबो डाॅलर की मदद ले चुका है. लेकिन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय पाकिस्तानी सेना और आईएसआई आतंकी संगठनों को मदद देकर उसे अपने काम के लिए इस्तेमाल कर रही है.

हालांकि, यह बात पिछले कुछ वर्षों में उजागर हुई और पाकिस्तान का भांडा फूट गया. इसी का कारण है अमेरीका समेत पश्चिम मुल्कों ने पाकिस्तान को देने वाली मदद पर नकैल कसी है. मदद बंद होने से इस समया पाकिस्तान आर्थिक नाकेबंदी हो रही है, फिर भी पाकिस्तान है कि, बाज आने को तैयार नहीं है.

अब एहसानुल्लाह के फरार होने से यह एक बार फिर साबित हुआ है कि, पाकिस्तान तालिबान को काफी हद तक शह दे रहा है. हालांकि, तालिबान के प्रति पाकिस्तान का यह प्यार एक ना एक दिन उसे ले डूबेगा, इसमें कोई दो राय नहीं है.

मिलिटरी स्कूल का मुख्य आरोपी है एहसानुल्लाह

पाकिस्तान के पेशावर में स्थित आर्मी स्कूल पर 16 दिसम्बर 2014 को आतंकियों ने जघन्य हमला किया था. इस हमले में आर्मी स्कूल में पढ़ रहे 132 छात्रों समेत 149 लोगों की मौत हुई थी. इस घटना से पूरे पाकिस्तान में शोक और ग़मो-गुस्से की लहर थी. साथ ही तालिबानी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आंदोलन हुए भी थे.

इस घटना की पूरे विश्व में काफी निंदा हुई, जिसके चलते पाकिस्तान को केवल नाम के तौर पर तालिबान के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी थी. बावजूद इसके तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान अपनी जड़े दिनो-दिन गहरी से गहरी होती जा रही है. आतंकवाद का जो जहर पाकिस्तान ने बोया, उसकी जहरीली फसल आज उसी के देश में उग रही है. इसी का यह नतीजा बताया जा रहा है.
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