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मोदी सरकार पर सीएजी की रिपोर्ट का सर्जीकल स्ट्राइक Surgical strike of CAG report on Modi government

 सेना के जवानों के पास कम साजो-सामान का लगाया आरोप



नई दिल्ली - केंद्र सरकार द्वारा किए जाने वाले खर्च का ऑडिट करने वाली सबसे बड़ी संस्था नियंत्रक एवं महालेखापाल (सीएजी) के रिपोर्ट से मोदी सरकार की काफी किरकिरी हो सकती है. सीएजी की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि, वर्ष 2015 से लेकर 2017 तक सीयाचीन और बाकी दूरदराज की सीमाओं पर जवानों के पास खाने, कपड़ों तथा जरुरी साजोसामान की काफी कमी थी, जिससे जवानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था.

सीएजी की इस रिपोर्ट को हाल ही में राज्य सभा में पेश किया गया. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि, सियाचीन, लद्दाख तथा डोकलाम स्थित इलाकों में, जहां जवानों को काफी कठीन परिस्थिति में काम करना पड़ता है, वहां जरुरी साजोसामान की काफी कमी का सामना करना पड़ा.

सियाचीन जहां पर 18 हजार से 23 हजार फीट की ऊंचाई पर जवानों को काफी विपरित परिस्थिति तैनात रहना पड़ता है उनके लिए जरुरी पौष्टिक भोजन, बरफ पर पड़ने वाली तेज चमकिली धूप से बचाने वाले गाॅगल्स, ठण्ड से बचाने वाले कपड़े तथा बाकी साजोसामान नहीं मिले. बर्फ की ठण्ड से बचाने वाले खास जूते जो जवानों को दिए गए वे रिसाइकिल्ड मटेरियल से बनाए गए थे. जोकि इस भीषण ठण्ड में नाकाफी साबित हुए.

सेना के जवानों की दुहाई देने वाले सत्ताधारी भाजपा की इस रिपोर्ट को लेकर काफी किरकिरी हो सकती है. क्योंकि इस रिपोर्ट को लेकर अब विपक्ष हमलावर हो रहा है. इस संदर्भ में सरकार की ओर से खुलासे की मांग विपक्ष की ओर से की जा सकती है.

इस संदर्भ में सेनाप्रमुख की ओर से खुलासा आया है कि, यह रिपोर्ट काफी पुरानी है और जवानों के पास साजोसामान की कमी जानकारी होने पर उसकी आपूर्ति कर दी गई है. इसलिए अब इस तरह की कोई दिक्कत नहीं है.

हालांकि, सेना के कुछ पूर्व उच्चाधिकारियों ने इसके संदर्भ में टिप्पणी करते हुए यह काफी गंभीर मामला बताया है. सेना के जवान इस तरह की कमी से हमेशा ही जूझते रहते है, यह कोई नया मामला नहीं, ऐसा इन अधिकारियों का कहना है.

इस विषय में बीबीसी ने सेना के पूर्व मेजर जनरल अशोक मेहता से बातचित की. उन्होंने बताया कि, सीएजी की यह रिपोर्ट काफी गंभीर है. इससे यह साबित होता है कि, हमारी सेना इस समय किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने को पूरी तरह से तैयार नहीं है.

मेहता बताते है कि, इस तरह की कमी पहली बार नहीं हुई है. इससे पहले 1999 में करगिल युद्ध के दौरान भी जवानों को जरुरी साजोसामान की तंगी से गुजरना पड़ा था. इस तंगी को कम कर सेना के जवानों को उचित सुविधा देने के लिए सरकार की ओर से जरुरी आवंटन बढ़ाने की आवश्यकता पर मेहता ने जोर दिया.

सीएजी की यह रिपोर्ट केंद्र सरकार पर एक तरह के सर्जीकल स्ट्राइक की तरह है. मोदी सरकार घेरने के लिए विपक्ष के हाथ में एक अहम मुद्दे की तरह यह रिपोर्ट काम करने वाली साबित हो सकती है.
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