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यल्गार परिषद मामले में एनआईए की चार्जशीट से देशद्रोह की धारा हुई गायब Treason stream disappeared in NIA charge sheet in Yalgar Parishad case

मामले में आ सकता है नया मोड़, भाजपा विरोधक हो सकते है आक्रामक

File Photo
पुणे - 31 दिसम्बर 2017 को पुणे में हुई यल्गार परिषद तथा माओवादी संगठन के साथ सांठ-गांठ मामले में अब जांच एनआईए के हवाले कर दी गई ै. लेकिन इस मामले में नया मोड़ आ सकता है, क्योंकि एनआईए द्वारा कोर्ट में दाखिल एफआईआर में देशद्रो की धारा को शामिल ही नहीं किया गया है.

एनआईए द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में 11 आरोपियों को नामजद किया गया है. इनमें से नौं लोग इस समय जेल की सलाखों के पीछे है. इन सभी पर यूएपीए की धाराओं के तहत मामला दर्ज है. पुणे पुलिस की ओर से जब इन सभी पर मामला दर्ज किया गया था, तब सभी पर धारा 124 ए लगाई गई थी. लेकिन अब नयी एफआईआर में इस धारा को शामिल नहीं किया गया.

ज्ञात हों कि, 31 दिसम्बर 2017 को पुणे के शनिवार वाड़ा में यल्गार परिषद का आयोजन किया गया था. इसके दूसरे ही दिन पुणे के समीप भीमा-कोरेगांव में पेशवाओं पर विजय की 200वीं सालगिरह थी, जिसके लिए पूरे देश से आंबेडकरी विचारधारा के लोग इसका जल्लोष मनाने के लिए आए थे.

यह कार्यक्रम चल ही रहा था कि, कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा शुरू कर दी. इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए और जमकर पथराव-आगजनी की गई. इस समय मची भगदड़ में भी कई लोग घायल हो गए थे. इस घटना के बाद महाराष्ट्र के कई जगहों पर भी हिंसा देखने को मिली थी.

इस घटना में हिंसाचार फैलाने का आरोप पुलिस की ओर से यल्गार परिषद पर लगाया गया. साथ ही यल्गार परिषद में माओवादियों का पैसा लगने तथा माओवादी नेताओं से संबंध रखने वालों के शामिल होने का आरोप लगाया गया था.

File Photo
इस मामले में पुणे पुलिस ने सुधीर ढवले, शोमा सेन, महेश राऊत, रोना विल्सन, सुरेंद्र गडलिंग, वरावरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, अरुण फरेरा, वर्नान गोन्साल्विस और आनंद तेलतुंबड़े को आरोपी बनाया.

पिछले करीब दो वर्षों से मामले की जांच पुणे पुलिस कर रही थी. लेकिन कुछ महिने पहले राज्य में सत्तापरिवर्तन हुआ और भाजपा की सरकार जाती रही. इसके जगह शिवसेना-काँग्रेस-राष्ट्रवादी काँग्रेस के महाविकास आघाड़ी की सरकार स्थापन हुई.

इस सरकार के कर्ताधर्ता तथा राष्ट्रवादी काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने भीमा-कोरेगांव मामले में पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा उचित जांच ना होने  का आरोप लगाते हुए इसकी फिर से जांच करने की मांग की थी. राज्य सरकार इस दिशा में विचार कर ही रही थी कि, मोदी सरकार ने आननफानन में इस मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेन्सी एनआईए को सौंप दी.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद से ही भाजपा और शिवसेना में अनबन के चलते महायुति टूट चुकी थी. इस घटना के बाद महाविकास आघाड़ी और भाजपा के बीच की तल्खियां और भी बढ़ गई. महाविकास आघाड़ी के नेताओं और मंत्रियों ने आरोप लगाया कि, एनआईए को जांच देकर केंद्र सरकार अपने नेताओं को बचाने का प्रयास कर रही है.

अब इस मामले में एनआईए  द्वारा दर्ज चार्जशीट में देशद्रोह की धारा का समावेश ना करने से सभी की भंवें तन गई है. इससे भाजपा के विरोधियों को उस पर हमला करने का एक और मौका मिल सकता है. साथ ही इस मामले की जांच में एक और नया मोड़ भी आ सकता है.
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